लोग कहते तो है पर बेटियां पराई नहीं होती..
वो भोली सी सूरत वो प्यारी सी शाम... किल्कारिओ की आँगन, रौशन मकान.. ... बधाइयों के मेले.. धीमी सी मुस्कान.. मगर फिर भी दिल दुखी है... ..............................वाह रे इंसान जना जिसे माँ ने वो दीपक नहीं था.. कुल का वारिश नहीं है, बेटा नहीं था.. ... मगर नन्ही सी कोमल बाती जरूर है... तेरे हर मुसीबत में साथी जरूर है क्या हुआ अगर आँगन में गुड़िया खेलेगी पापा के बाँहों में झूला झुलेगी.. ....अगर ख़्वाइसों के पर भी निकले तो.. क्या हुआ अगर वो कोई ख़्वाब ही बून ले तो.. ..बेटियां है वो, मूरत नहीं है... जिन्दा है तो कोई मंजिल ही चुन ले तो.. .. लाचार होती है बेटियां ये समाज कहता है.. मगर कल्पना कमजोर नहीं थी ये हर आवाज कहता है.. बराबर का मौका दे कर तो देखो छु लेगी मुकद्दर, समय का आगाज कहता है... .. बेटियों को जनने से रुस्वाई नहीं होती... लोग कहते तो है, पर बेटियां पराई नहीं होती।। -स...