कैसे कहूँ....
इन आँखों की रवानी भी कैसे कहूँ..
हाल-ए-दिल जुबानी भी कैसे कहूँ
समझ नहीं आता तेरे इन्तेजार में जीकर
तेरी बेरुखी को तेरी नादानी भी कैसे कहूँ..
कभी रात के चकोरों से तेरा हाल पूछता हूँ..
रंगीन तितलियों से सूरत-ए-बहाल पूछता हूँ..
पता है कई राज छुपाए हो मुझसे....
मगर उन बहानो को कहानी भी कैसे कहूँ..
तेरे मुस्कुराहटों के पीछे के आँशु को देखे है मैंने...
तुम चाह कर भी दूर नहीं हो मुझसे...
धड़कता आज भी दिल तुम्हारा मेरे लिए है
मगर इन दूरियों को आख़री निशानी भी कैसे कहूँ...।
-सौरभ कुमार

khatarnaaqqqq
ReplyDeleteThank you.
DeleteAwesome
ReplyDeleteThank you
DeleteShyar kb se ban gaya mera bhai
ReplyDeleteBus hale dil likha or sayeri bn gai
DeleteBus hale dil likha or sayeri bn gai
Deletegajab bhai ji
ReplyDeleteअब मैं क्या बोलूं 💝🥰🥰🥰
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