मौत तू कड़वी सच्चाई है...
ए मौत तू सच नहीं,
........कड़वी सच्चाई है।
तू इतना नासमझ है, न मजबूरिया समझता है,
न उम्र का महत्व...
चल सुन आज मेरे दर्द का समंदर,
मैंने देखा है अपनो को तेरी आगोश में
जो कुछ घंटों पहले अपनी हंसी से शोर मचा रहा था।
हाँ, उसके उस शांत निर्जन शरीर ने तोड़ दिया मुझे,
अगर तू भी मेरी नजर से देखता,
तू भी बिखड़ जाता।
मैन सहा है उन पलों को,
जो मेरी दुनिया के अनमोल सितारे थे,
बिखरे थें मेरी गोद में तुझे गले लगाकर,
जो मेरे आँसू न देख सकते कभी,
आज तुझे पाकर...
वो मेरे कराहते दिल को न सुन पा रहे है।
ये मौत तू सच नहीं, कड़वी सच्चाई है,
क्या तुझे दर्द नहीं दिखता,
उन मजबूर मरीजों का...
जो अस्पतालों के पंक्तियों में
झुकी हड्डियों पर जीवन की आश देखते है,
क्या तुझे तनिक भी दया नहीं आती,
उन मासूम बच्चों पर
जो बिना तुम्हें समझे अपनी जिंदगी अस्पतालों के कठोर बिस्तर पे गुजार रहें है,
अगर तू उन अबोध को भी एक उम्मीद नहीं दे सकता तो सुन,
ए मौत तू सच नहीं, कड़वी सच्चाई है।
मैं कैसे बया करू अपने दर्द को
क्या बताऊँ
की अपने छोटे भाइयो को शांत निर्जीव देखकर
हृदय चीख़ उठता है,
रोम रोम कांप जाता है,
आखिर कसुर क्या था उस 6 साल के बच्चे का
जो एक अप्राकृतिक दुर्घटना में कुछ पलों में रो कर निर्जिव हो गया,
क्या मौत तू इतना नासमझ है...
कि उस अबोध के साथ न्याय भी नहीं कर सकता?
तो सुन कभी उन बच्चों को बिलखते देख
जिनके संसार तूने छीन लिए,
कभी उन बुजुर्गों को कराहते देख
जिनसे उनके बच्चों को छीने है,
तू पत्थर भी नहीं हो सकता,
जो किसी से उसका संसार , सपने, कर्तव्य, उम्मीद समय से पहले ही खत्म कर दे।
कभी फुर्सत हो तो चले आना,
अस्पतालों के गलियारों में, शमशानों की खामोशियों में,
तू भी देखेगा पीड़ा क्या होती है किसी अनमोल को खोने का,
एक उम्मीद के मरने का।
तू भी कड़ाह उठेगा अपने दिए दर्द से,
तू भी टूटेगा अपने को खो कर,
तू भी बिलखेगा किसी को यूँ शांत निर्जन देख कर।
फिर तुझे मेरे दर्द का अहसास होगा...
फिर तुझे मेरे दर्द का अहसास होगा।।।
-सौरभ कुमार

Very nice
ReplyDeleteThank you.
Deleteabsultly right
ReplyDeleteheart touching
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