लड़कियां...

किस तक़दीर की बात करते हो साहब
.............रोटी की जुगाड़ में नसीब देखना भूल गए,

..इन बेटियों को कवन कहे पापा की प्रिंसेस
...........इन्हेंपाकर तो हर बाप के किस्मत खुल गए।

...महंगी आभूषणों की के बात करू साहब.
...........लोग गरीब कहते है इन्हे
.....मगर खाली पेट से... दर्द में मुस्कुरा दे
............इसेभी नसीब कहते है....।

...किस बात के मंदिर मांगू इनको... किस बात की देवी मइया
.........बहन के बदन के दर्द को समझ न सका कोई भईया.....

तलवारों के रैली से क्या रोक सकोगे भूख को
......क्या सूरज पे भी पहरा है जो रोक सकोगे धुप को

....इंसान समझ न आता जिनको भगवान समझने बैठे है
.........और अब भी पाखंडी, बेटियों को सामान समझके बैठे है

.....जिन बहनों को भर पेट रोटी है,
 नए कपड़ो की थान है.
................लंबी लंबी गाड़ी है
 ऊँचे ऊँचे मकान है,
..जरा उन बहनों से कहना है..
..........जब एक देश में सबको रहना है
..... लाचार बहनो के साथ बनो.
............उनके अच्छे जीवन की एक नई सुरुआत बनो

.....तुम सामान नहीं इंसान भी हो.
..धरती पे एक वरदान भी हो.

.......हम मानवता के सेवक है,
 हम अम्बेडकरवादी है
बहनो के संरक्षण में खड़ी हमारी आवादी है।
...हम लड़ते है पाखंडी से..........।।।
हम जीते है इंसान से...
अगर बेटियां शोषित होंगी...
.....तो लड़ लेंगे भगवन से......

                            -सौरभ कुमार

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